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राजभाषा: संविधान में, क़ानून में, या कहीं भी नहीं

राजभाषा: संविधान में, क़ानून में, या कहीं भी नहीं

दुनिया कैसे मनाती है

भारत का संविधान भाषा के लिए एक पूरा भाग रखता है; अनुच्छेद 343 देवनागरी लिपि की हिन्दी को संघ की राजभाषा बनाता है और अंग्रेज़ी के लिए पंद्रह वर्ष का संक्रमण-प्रावधान भी देता है। इंडोनेशिया का संविधान एक ही वाक्य में तय कर देता है — राष्ट्र की भाषा इंडोनेशियाई है। ब्राज़ील का अनुच्छेद 13 भी एक ही वाक्य। चीन के संविधान में "राजभाषा" शब्द है ही नहीं; वहाँ "देशव्यापी प्रचलित पुतोंगहुआ का प्रसार" शिक्षा वाले अनुच्छेद की आख़िरी पंक्ति में रखा गया है। ताइवान उल्टा चलता है: उसका राष्ट्रीय भाषा विकास अधिनियम कोई एक राष्ट्रभाषा नहीं चुनता, बल्कि हर मूल समुदाय की भाषा और ताइवानी सांकेतिक भाषा को समान दर्जे की राष्ट्रीय भाषाएँ घोषित करता है। जापान में कोई क़ानूनी राजभाषा है ही नहीं। अमेरिका में भी न संविधान में है न कांग्रेस के क़ानून में — मार्च 2025 में कार्यकारी आदेश से अंग्रेज़ी को नामित किया गया।

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        ब्राज़ील में राजभाषा: संविधान में, क़ानून में, या कहीं भी नहीं कैसे मनाया जाता है?

        ब्राज़ील के संविधान का अनुच्छेद 13: पुर्तगाली भाषा ब्राज़ील संघीय गणराज्य की राजभाषा है। एक वाक्य, इंडोनेशिया जितना ही दो-टूक — पर आगे के दो उपखंड एक अलग बल दिखाते हैं। पहला गणराज्य के प्रतीक गिनाता है: ध्वज, गान, राजचिह्न और राजमुद्रा। भाषा प्रतीकों से पहले, अपने अलग वाक्य में लिखी है, न कि इंडोनेशिया की तरह ध्वज-चिह्न-गान के साथ एक ही समूह में। दूसरा उपखंड कहता है कि राज्य, संघीय ज़िला और नगरपालिकाएँ अपने प्रतीक रख सकते हैं। यानी एक ही अनुच्छेद में दो काम एक साथ: भाषा को संघीय स्तर पर एक करना, और प्रतीकों का अधिकार स्थानीय स्तर को सौंपना। यह अमेरिका से ठीक उलटी दिशा है, जहाँ संघीय स्तर ख़ाली रहा और राज्यों ने अपने लिए ख़ुद तय किया। ब्राज़ील में आज भी बहुत-सी आदिवासी और प्रवासी समुदायों की भाषाएँ बोली जाती हैं, और कुछ नगरपालिकाओं ने उनमें से किसी को सह-राजभाषा बनाने का अपना क़ानून बनाया है — वह अनुच्छेद 13 के बाहर, स्थानीय स्तर पर होता है।

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        चीन में राजभाषा: संविधान में, क़ानून में, या कहीं भी नहीं कैसे मनाया जाता है?

        चीन के संविधान में "राजभाषा" शब्द कभी नहीं आता। भाषा तीन अलग-अलग जगहों पर आती है, और यह बिखराव ही उत्तर है। अनुच्छेद 4, जो राष्ट्रीयताओं वाले अध्याय में है, कहता है कि हर राष्ट्रीयता को अपनी बोली और लिपि के प्रयोग तथा विकास की, और अपने रीति-रिवाज बनाए रखने या बदलने की स्वतंत्रता है। अनुच्छेद 19 — जो शिक्षा वाला अनुच्छेद है — अनिवार्य शिक्षा के प्रसार और माध्यमिक व उच्च शिक्षा के विकास की बात कहने के बाद, आख़िरी पंक्ति में कहता है: राज्य देशव्यापी प्रचलित पुतोंगहुआ का प्रसार करेगा। यानी संविधान की बनावट में मानक भाषा का प्रसार भाषा के दर्जे का प्रावधान है ही नहीं; वह एक शैक्षिक कार्यभार है। अनुच्छेद 121 फिर व्यावहारिक पक्ष जोड़ता है: राष्ट्रीय स्वायत्त क्षेत्रों के स्वशासी अंग अपने कार्य करते समय, उस क्षेत्र के स्वायत्तता-नियमों के अनुसार, वहाँ प्रचलित एक या अनेक भाषाओं का प्रयोग करते हैं। स्वतंत्रता राष्ट्रीयता अध्याय में, प्रसार शिक्षा अध्याय में, वास्तविक प्रयोग स्वायत्तता अध्याय में — और कहीं भी ऐसा वाक्य नहीं जो कहे "राज्य की राजभाषा है…"।

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        इंडोनेशिया में राजभाषा: संविधान में, क़ानून में, या कहीं भी नहीं कैसे मनाया जाता है?

        इंडोनेशिया का संविधान एक ही वाक्य में मामला ख़त्म कर देता है: अनुच्छेद 36 — राष्ट्र की भाषा इंडोनेशियाई है। न शर्तें, न संक्रमण-प्रावधान, न अपवादों की सूची। इस वाक्य का भार महसूस करने के लिए देखना होगा कि वह कहाँ रखा है: अनुच्छेद 36 के आसपास हैं राष्ट्रध्वज (अनुच्छेद 35), "विविधता में एकता" ध्येयवाक्य वाला राजचिह्न (36A), और राष्ट्रगान (36B)। भाषा को राष्ट्रीय प्रतीकों के समूह में रखा गया है — ध्वज, चिह्न और गान के साथ। यह भारत के उस निर्णय से बिलकुल अलग है जो भाषा को प्रशासनिक संचालन वाले भाग में रखता है, और चीन से भी, जो उसे राष्ट्रीयता और शिक्षा दो अध्यायों में बिखेर देता है। ऐतिहासिक भार भी वहीं है: इंडोनेशियाई सबसे बड़े समूह की मातृभाषा नहीं है — वह जावानी है — बल्कि साझा भाषा के रूप में चुनी गई मलय की एक क़िस्म है। उसे प्रतीकों के बीच लिखना यह घोषित करने जैसा है कि इस देश की एकता विरासत में नहीं मिली, चुनी गई है।

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        भारत में राजभाषा: संविधान में, क़ानून में, या कहीं भी नहीं कैसे मनाया जाता है?

        इन सात बाज़ारों में भारत अकेला है जिसके संविधान में भाषा के लिए एक पूरा भाग है। अनुच्छेद 343(1): संघ की राजभाषा देवनागरी लिपि में हिन्दी होगी, और संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतरराष्ट्रीय रूप होगा। अंकों का रूप तक संविधान में लिखा होना यह बताता है कि उस समय के विवाद कितने ठोस थे। खंड (2) फिर पंद्रह वर्ष का संक्रमण रखता है: संविधान के प्रारंभ से पंद्रह वर्ष तक अंग्रेज़ी उन सभी राजकीय प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त होती रहेगी जिनके लिए वह पहले प्रयुक्त हो रही थी। यह "पंद्रह वर्ष" भारतीय भाषा-राजनीति की निर्णायक रचना थी — उसने एक अंतिम बिंदु पहले से लिख दिया, और उस बिंदु के पास आने पर जो वास्तव में हुआ उससे आगे के क़ानून और संशोधन निकले। यह भाग राज्यों की राजभाषाओं, एक राज्य से दूसरे राज्य के पत्राचार की भाषा, तथा उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों की भाषा को भी संभालता है। इंडोनेशिया और ब्राज़ील के एक-वाक्य वाले निपटारे के बगल में, भारत "कौन-सी भाषा" का नहीं, बल्कि बहुभाषी राज्य के स्तर आपस में कैसे बात करें का उत्तर दे रहा है।

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        जापान में राजभाषा: संविधान में, क़ानून में, या कहीं भी नहीं कैसे मनाया जाता है?

        जापान में क़ानूनी राजभाषा है ही नहीं। संविधान में यह शब्द नहीं आता, और जापानी को राजभाषा घोषित करने वाला कोई अधिनियम भी नहीं है। व्यवहार में जापानी स्वाभाविक रूप से चलती है, पर वह परंपरा और अलग-अलग क़ानूनों के संचालन का जोड़ है, किसी घोषणा-प्रावधान का नहीं। सबसे नज़दीकी चीज़ है "जापानी भाषा शिक्षा के संवर्धन संबंधी अधिनियम" (2019 का अधिनियम संख्या 48) — और जैसा उसका नाम कहता है, वह शिक्षण के संवर्धन को नियंत्रित करता है, दर्जा देने को नहीं: वह देश और विदेश में जापानी भाषा शिक्षा के अवसर बढ़ाने, उसका स्तर बनाए रखने और शोध को सहारा देने के उपाय गिनाता है। नामित करने वाले प्रावधान का न होना, इन सात के तुलनात्मक चित्र में अपने आप में अर्थपूर्ण है: भारत ने इस पर एक पूरा भाग ख़र्च किया, इंडोनेशिया और ब्राज़ील ने एक-एक वाक्य में निपटा दिया, अमेरिका ने बाद में कार्यकारी आदेश से नामित किया। जापान ने इनमें से कुछ नहीं किया।

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        ताइवान में राजभाषा: संविधान में, क़ानून में, या कहीं भी नहीं कैसे मनाया जाता है?

        ताइवान का तरीक़ा इन सात बाज़ारों में अकेला है: वह किसी एक राष्ट्रभाषा को नामित ही नहीं करता। राष्ट्रीय भाषा विकास अधिनियम की धारा 3 कहती है कि इस क़ानून में "राष्ट्रीय भाषा" का अर्थ है ताइवान के प्रत्येक मूल समुदाय द्वारा प्रयुक्त प्राकृतिक भाषाएँ तथा ताइवानी सांकेतिक भाषा; धारा 4 आगे कहती है कि सभी राष्ट्रीय भाषाएँ समान हैं और उनके प्रयोग पर किसी के साथ भेदभाव या रोक नहीं होगी। यानी यह क़ानून अनेक भाषाओं में से एक को ऊपर नहीं उठाता — वह उन्हें एक समुच्चय के रूप में लेता है और परस्पर समान घोषित करता है। सांकेतिक भाषा का उसी सूची में होना इसका सबसे साफ़ प्रमाण है: यहाँ राष्ट्रीय भाषा वह है जो इस द्वीप के लोग सचमुच बोलते हैं, न कि वह जिसमें सरकार काम करती है। धारा 7 यह भी जोड़ती है कि जिन भाषाओं की परंपरा टूटने के कगार पर है, उनके पुनरुज्जीवन को प्राथमिकता मिलेगी। यह भारत की उस संरचना का ठीक उलटा है जो एक भाषा नामित करती है और बाक़ी के लिए अलग प्रावधान बनाती है।

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        संयुक्त राज्य में राजभाषा: संविधान में, क़ानून में, या कहीं भी नहीं कैसे मनाया जाता है?

        अमेरिकी संविधान किसी राजभाषा को नामित नहीं करता, और कांग्रेस ने भी ऐसा कोई क़ानून कभी नहीं बनाया। यह ख़ालीपन दो सौ से अधिक वर्ष टिका रहा, जब तक 6 मार्च 2025 को "अंग्रेज़ी को संयुक्त राज्य की राजभाषा के रूप में नामित करना" शीर्षक वाला एक कार्यकारी आदेश फ़ेडरल रजिस्टर में प्रकाशित नहीं हुआ। साधन कार्यकारी आदेश था — न संविधान संशोधन, न कांग्रेस का क़ानून — और यही इस प्रविष्टि को देखने लायक़ बनाता है: वही निर्णय भारत और इंडोनेशिया में संविधान में बैठा है, ताइवान में एक अधिनियम में, और अमेरिका में एक बाद की कार्यपालिका-घोषणा में। स्तर अलग हो तो पलटने का तरीक़ा भी अलग होता है: संविधान के प्रावधान के लिए संशोधन चाहिए, क़ानून के लिए कांग्रेस, और कार्यकारी आदेश अगला राष्ट्रपति एक हस्ताक्षर से रद्द कर सकता है। संघीय और राज्य स्तर को अलग करके देखना भी ज़रूरी है: जब तक संघीय स्तर ख़ाली रहा, अधिकांश राज्य कब के अपने-अपने संविधान या संहिता में अंग्रेज़ी को नामित कर चुके थे।

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      स्रोत और तारीख़ें

      तारीख़ें स्थानीय समय, कैलेंडर और आधिकारिक सूचनाओं पर आधारित हैं। अनुमानित या स्थानीय तारीख़ के लिए स्रोत देखें।