विषय: राजभाषा: संविधान में, क़ानून में, या कहीं भी नहीं
इंडोनेशिया में राजभाषा: संविधान में, क़ानून में, या कहीं भी नहीं कैसे मनाया जाता है?
रोज़मर्रा का विषय
इंडोनेशिया का संविधान एक ही वाक्य में मामला ख़त्म कर देता है: अनुच्छेद 36 — राष्ट्र की भाषा इंडोनेशियाई है। न शर्तें, न संक्रमण-प्रावधान, न अपवादों की सूची। इस वाक्य का भार महसूस करने के लिए देखना होगा कि वह कहाँ रखा है: अनुच्छेद 36 के आसपास हैं राष्ट्रध्वज (अनुच्छेद 35), "विविधता में एकता" ध्येयवाक्य वाला राजचिह्न (36A), और राष्ट्रगान (36B)। भाषा को राष्ट्रीय प्रतीकों के समूह में रखा गया है — ध्वज, चिह्न और गान के साथ। यह भारत के उस निर्णय से बिलकुल अलग है जो भाषा को प्रशासनिक संचालन वाले भाग में रखता है, और चीन से भी, जो उसे राष्ट्रीयता और शिक्षा दो अध्यायों में बिखेर देता है। ऐतिहासिक भार भी वहीं है: इंडोनेशियाई सबसे बड़े समूह की मातृभाषा नहीं है — वह जावानी है — बल्कि साझा भाषा के रूप में चुनी गई मलय की एक क़िस्म है। उसे प्रतीकों के बीच लिखना यह घोषित करने जैसा है कि इस देश की एकता विरासत में नहीं मिली, चुनी गई है।
यह विषय क्या है?
भारत का संविधान भाषा के लिए एक पूरा भाग रखता है; अनुच्छेद 343 देवनागरी लिपि की हिन्दी को संघ की राजभाषा बनाता है और अंग्रेज़ी के लिए पंद्रह वर्ष का संक्रमण-प्रावधान भी देता है। इंडोनेशिया का संविधान एक ही वाक्य में तय कर देता है — राष्ट्र की भाषा इंडोनेशियाई है। ब्राज़ील का अनुच्छेद 13 भी एक ही वाक्य। चीन के संविधान में "राजभाषा" शब्द है ही नहीं; वहाँ "देशव्यापी प्रचलित पुतोंगहुआ का प्रसार" शिक्षा वाले अनुच्छेद की आख़िरी पंक्ति में रखा गया है। ताइवान उल्टा चलता है: उसका राष्ट्रीय भाषा विकास अधिनियम कोई एक राष्ट्रभाषा नहीं चुनता, बल्कि हर मूल समुदाय की भाषा और ताइवानी सांकेतिक भाषा को समान दर्जे की राष्ट्रीय भाषाएँ घोषित करता है। जापान में कोई क़ानूनी राजभाषा है ही नहीं। अमेरिका में भी न संविधान में है न कांग्रेस के क़ानून में — मार्च 2025 में कार्यकारी आदेश से अंग्रेज़ी को नामित किया गया।
स्रोत और तारीख़ें
तारीख़ें स्थानीय समय, कैलेंडर और आधिकारिक सूचनाओं पर आधारित हैं। अनुमानित या स्थानीय तारीख़ के लिए स्रोत देखें।