विषय: राजभाषा: संविधान में, क़ानून में, या कहीं भी नहीं
जापान में राजभाषा: संविधान में, क़ानून में, या कहीं भी नहीं कैसे मनाया जाता है?
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जापान में क़ानूनी राजभाषा है ही नहीं। संविधान में यह शब्द नहीं आता, और जापानी को राजभाषा घोषित करने वाला कोई अधिनियम भी नहीं है। व्यवहार में जापानी स्वाभाविक रूप से चलती है, पर वह परंपरा और अलग-अलग क़ानूनों के संचालन का जोड़ है, किसी घोषणा-प्रावधान का नहीं। सबसे नज़दीकी चीज़ है "जापानी भाषा शिक्षा के संवर्धन संबंधी अधिनियम" (2019 का अधिनियम संख्या 48) — और जैसा उसका नाम कहता है, वह शिक्षण के संवर्धन को नियंत्रित करता है, दर्जा देने को नहीं: वह देश और विदेश में जापानी भाषा शिक्षा के अवसर बढ़ाने, उसका स्तर बनाए रखने और शोध को सहारा देने के उपाय गिनाता है। नामित करने वाले प्रावधान का न होना, इन सात के तुलनात्मक चित्र में अपने आप में अर्थपूर्ण है: भारत ने इस पर एक पूरा भाग ख़र्च किया, इंडोनेशिया और ब्राज़ील ने एक-एक वाक्य में निपटा दिया, अमेरिका ने बाद में कार्यकारी आदेश से नामित किया। जापान ने इनमें से कुछ नहीं किया।
यह विषय क्या है?
भारत का संविधान भाषा के लिए एक पूरा भाग रखता है; अनुच्छेद 343 देवनागरी लिपि की हिन्दी को संघ की राजभाषा बनाता है और अंग्रेज़ी के लिए पंद्रह वर्ष का संक्रमण-प्रावधान भी देता है। इंडोनेशिया का संविधान एक ही वाक्य में तय कर देता है — राष्ट्र की भाषा इंडोनेशियाई है। ब्राज़ील का अनुच्छेद 13 भी एक ही वाक्य। चीन के संविधान में "राजभाषा" शब्द है ही नहीं; वहाँ "देशव्यापी प्रचलित पुतोंगहुआ का प्रसार" शिक्षा वाले अनुच्छेद की आख़िरी पंक्ति में रखा गया है। ताइवान उल्टा चलता है: उसका राष्ट्रीय भाषा विकास अधिनियम कोई एक राष्ट्रभाषा नहीं चुनता, बल्कि हर मूल समुदाय की भाषा और ताइवानी सांकेतिक भाषा को समान दर्जे की राष्ट्रीय भाषाएँ घोषित करता है। जापान में कोई क़ानूनी राजभाषा है ही नहीं। अमेरिका में भी न संविधान में है न कांग्रेस के क़ानून में — मार्च 2025 में कार्यकारी आदेश से अंग्रेज़ी को नामित किया गया।
स्रोत और तारीख़ें
तारीख़ें स्थानीय समय, कैलेंडर और आधिकारिक सूचनाओं पर आधारित हैं। अनुमानित या स्थानीय तारीख़ के लिए स्रोत देखें।