aeiou.now

विषय: राजभाषा: संविधान में, क़ानून में, या कहीं भी नहीं

ताइवान में राजभाषा: संविधान में, क़ानून में, या कहीं भी नहीं कैसे मनाया जाता है?

रोज़मर्रा का विषय

ताइवान का तरीक़ा इन सात बाज़ारों में अकेला है: वह किसी एक राष्ट्रभाषा को नामित ही नहीं करता। राष्ट्रीय भाषा विकास अधिनियम की धारा 3 कहती है कि इस क़ानून में "राष्ट्रीय भाषा" का अर्थ है ताइवान के प्रत्येक मूल समुदाय द्वारा प्रयुक्त प्राकृतिक भाषाएँ तथा ताइवानी सांकेतिक भाषा; धारा 4 आगे कहती है कि सभी राष्ट्रीय भाषाएँ समान हैं और उनके प्रयोग पर किसी के साथ भेदभाव या रोक नहीं होगी। यानी यह क़ानून अनेक भाषाओं में से एक को ऊपर नहीं उठाता — वह उन्हें एक समुच्चय के रूप में लेता है और परस्पर समान घोषित करता है। सांकेतिक भाषा का उसी सूची में होना इसका सबसे साफ़ प्रमाण है: यहाँ राष्ट्रीय भाषा वह है जो इस द्वीप के लोग सचमुच बोलते हैं, न कि वह जिसमें सरकार काम करती है। धारा 7 यह भी जोड़ती है कि जिन भाषाओं की परंपरा टूटने के कगार पर है, उनके पुनरुज्जीवन को प्राथमिकता मिलेगी। यह भारत की उस संरचना का ठीक उलटा है जो एक भाषा नामित करती है और बाक़ी के लिए अलग प्रावधान बनाती है।

यह विषय क्या है?

भारत का संविधान भाषा के लिए एक पूरा भाग रखता है; अनुच्छेद 343 देवनागरी लिपि की हिन्दी को संघ की राजभाषा बनाता है और अंग्रेज़ी के लिए पंद्रह वर्ष का संक्रमण-प्रावधान भी देता है। इंडोनेशिया का संविधान एक ही वाक्य में तय कर देता है — राष्ट्र की भाषा इंडोनेशियाई है। ब्राज़ील का अनुच्छेद 13 भी एक ही वाक्य। चीन के संविधान में "राजभाषा" शब्द है ही नहीं; वहाँ "देशव्यापी प्रचलित पुतोंगहुआ का प्रसार" शिक्षा वाले अनुच्छेद की आख़िरी पंक्ति में रखा गया है। ताइवान उल्टा चलता है: उसका राष्ट्रीय भाषा विकास अधिनियम कोई एक राष्ट्रभाषा नहीं चुनता, बल्कि हर मूल समुदाय की भाषा और ताइवानी सांकेतिक भाषा को समान दर्जे की राष्ट्रीय भाषाएँ घोषित करता है। जापान में कोई क़ानूनी राजभाषा है ही नहीं। अमेरिका में भी न संविधान में है न कांग्रेस के क़ानून में — मार्च 2025 में कार्यकारी आदेश से अंग्रेज़ी को नामित किया गया।

स्रोत और तारीख़ें

तारीख़ें स्थानीय समय, कैलेंडर और आधिकारिक सूचनाओं पर आधारित हैं। अनुमानित या स्थानीय तारीख़ के लिए स्रोत देखें।