
कहीं भर्ती, कहीं सिर्फ़ पंजीकरण, कहीं संविधान में लिखा कर्तव्य भर
दुनिया कैसे मनाती हैताइवान के सैन्य सेवा अधिनियम की धारा 1 एक ही वाक्य है — हर पुरुष नागरिक पर सेवा का कर्तव्य है — और धारा 16 सक्रिय भर्ती-सेवा को एक वर्ष तय करती है। चीन का संविधान सैन्य सेवा को "गौरवपूर्ण दायित्व" कहता है। ब्राज़ील का संविधान इसे अनिवार्य बताता है, फिर अंतरात्मा के आधार पर वैकल्पिक सेवा देता है और शांतिकाल में महिलाओं तथा धर्माचार्यों को छूट देता है। अमेरिका और भी अजीब है: 50 U.S.C. §3802 अठारह से छब्बीस वर्ष के पुरुषों से पंजीकरण माँगता है, पर बुलाया लगभग किसी को नहीं जाता। जापान का संविधान थल, जल और वायु सेना रखता ही नहीं। इंडोनेशिया और भारत दोनों संविधान में रक्षा का कर्तव्य लिखते हैं और दोनों में अनिवार्य भर्ती नहीं है।
त्वरित उत्तर
| देश | यह कब होता है? | तारीख़ कैसे तय होती है |
|---|---|---|
| भारत | तारीख़ की पुष्टि बाकी है | सालभर |
| ब्राज़ील | तारीख़ की पुष्टि बाकी है | सालभर |
| चीन | तारीख़ की पुष्टि बाकी है | सालभर |
| इंडोनेशिया | तारीख़ की पुष्टि बाकी है | सालभर |
| जापान | तारीख़ की पुष्टि बाकी है | सालभर |
| ताइवान | तारीख़ की पुष्टि बाकी है | सालभर |
| संयुक्त राज्य | तारीख़ की पुष्टि बाकी है | सालभर |
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दुनिया कैसे मनाती है
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ब्राज़ील में कहीं भर्ती, कहीं सिर्फ़ पंजीकरण, कहीं संविधान में लिखा कर्तव्य भर कैसे मनाया जाता है?
ब्राज़ील के संविधान का अनुच्छेद 143 संक्षेप में शुरू होता है: सैन्य सेवा क़ानून के अनुसार अनिवार्य है। पर असली सार आगे के दो उपखंडों में है। उपखंड 1 सशस्त्र बलों से अपेक्षा करता है कि वे उन लोगों के लिए वैकल्पिक सेवा नियत करें जो शांतिकाल में नामांकन के बाद अंतरात्मा की अनिवार्यता का हवाला दें — और संविधान स्वयं बताता है कि उसका अर्थ क्या है: धार्मिक आस्था से, अथवा दार्शनिक या राजनीतिक विश्वास से उपजी अनिवार्यता। अंतरात्मा के आधार पर इनकार को संविधान के पाठ में, परिभाषा सहित, लिखने वाला इन सातों में केवल ब्राज़ील है। उपखंड 2 महिलाओं और धर्माचार्यों को शांतिकाल की अनिवार्य सेवा से छूट देता है, यद्यपि वे अन्य दायित्वों के अधीन रहते हैं। समय-सीमा 1964 के क़ानून संख्या 4.375 के अनुच्छेद 5 में है: शांतिकाल में दायित्व नागरिक के अठारह वर्ष पूरा करने वाले वर्ष की 1 जनवरी से शुरू होकर पैंतालीस वर्ष वाले वर्ष की 31 दिसंबर तक चलता है; एक और उपखंड सत्रह वर्ष से स्वैच्छिक सेवा की अनुमति देता है।
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चीन में कहीं भर्ती, कहीं सिर्फ़ पंजीकरण, कहीं संविधान में लिखा कर्तव्य भर कैसे मनाया जाता है?
चीन रक्षा को संविधान के उस अध्याय में लिखता है जो नागरिकों के कर्तव्य गिनाता है। अनुच्छेद 55 दो वाक्यों का है और दोनों का स्वर अलग है। पहला: मातृभूमि की रक्षा और आक्रमण का प्रतिरोध चीन जनवादी गणराज्य के हर नागरिक का पवित्र कर्तव्य है। दूसरा: क़ानून के अनुसार सैन्य सेवा करना और मिलिशिया संगठन में शामिल होना नागरिकों का गौरवपूर्ण दायित्व है। पहले वाक्य में न लिंग की सीमा है न आयु की, और न ही कोई निश्चित कार्य बताया गया है; संस्थाओं तक दूसरा वाक्य ही उतरता है, और वह मिलिशिया को सेना के साथ रखता है — रक्षा का वाहक केवल सेना नहीं है। दायित्व को "अनिवार्य" नहीं बल्कि "गौरवपूर्ण" कहना ताइवान के सैन्य सेवा अधिनियम की धारा 1 से स्वर का सबसे स्पष्ट अंतर है: एक इसे सम्मान की तरह लिखता है, दूसरा क़ानूनी ज़िम्मेदारी की तरह। वास्तविक भर्ती, आयु और सेवा-अवधि सैन्य सेवा क़ानून तय करता है।
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इंडोनेशिया में कहीं भर्ती, कहीं सिर्फ़ पंजीकरण, कहीं संविधान में लिखा कर्तव्य भर कैसे मनाया जाता है?
इंडोनेशिया के 1945 के संविधान का अनुच्छेद 30(1) असामान्य ढंग से लिखा गया है: हर नागरिक को राष्ट्र की रक्षा और सुरक्षा के प्रयास में भाग लेने का अधिकार भी है और कर्तव्य भी। अधिकार और कर्तव्य को एक ही वाक्य में रखना इन सात संविधानों में अकेला उदाहरण है। खंड (2) फिर तरीक़ा बताता है — रक्षा और सुरक्षा समग्र जन-रक्षा एवं सुरक्षा प्रणाली (sishankamrata) से चलाई जाएगी, जिसमें इंडोनेशियाई राष्ट्रीय सशस्त्र बल और राष्ट्रीय पुलिस मुख्य शक्ति होंगे तथा जनता सहायक शक्ति; खंड (3) जोड़ता है कि सशस्त्र बल थल, जल और वायु सेना से बने हैं। यानी रचना "व्यक्तियों को सेना में भर्ती करने" की नहीं, "पूरी आबादी को सहायक भूमिका में रखने" की है। यह ताइवान और चीन की उन व्यवस्थाओं से बिलकुल अलग है जो आयु और सेवा-अवधि पर टिकी हैं: न अनिवार्य भर्ती है, न ऐसा कोई कालखंड जिससे सबको गुज़रना हो — फिर भी संविधान हर व्यक्ति को उस प्रणाली में लिख देता है।
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भारत में कहीं भर्ती, कहीं सिर्फ़ पंजीकरण, कहीं संविधान में लिखा कर्तव्य भर कैसे मनाया जाता है?
भारत में अनिवार्य भर्ती नहीं है; सशस्त्र बल पूरी तरह स्वैच्छिक हैं। फिर भी रक्षा का कर्तव्य संविधान में लिखा है। अनुच्छेद 51A में गिनाए गए मूल कर्तव्यों में खंड (घ) कहता है: भारत के हर नागरिक का कर्तव्य होगा कि वह देश की रक्षा करे और आह्वान किए जाने पर राष्ट्र की सेवा करे। "आह्वान किए जाने पर" ही असली कब्ज़ा है: कर्तव्य सशर्त है, और वह शर्त कभी चालू नहीं हुई। निदेशक तत्वों से अलग, जिनके बारे में अनुच्छेद 37 कहता है कि कोई न्यायालय उन्हें प्रवर्तित नहीं कर सकता, मूल कर्तव्य 1976 में जोड़ा गया एक पूरा भाग हैं — और उनके साथ भी कोई दंड-प्रावधान नहीं आता। इसलिए भारत इन सात बाज़ारों में तीसरा रूप प्रस्तुत करता है: न ताइवान-चीन की तरह सेवा को संस्था बनाता है, न जापान की तरह बल रखने से ही इनकार करता है, बल्कि कर्तव्य को साफ़ लिखकर उसे चालू करने वाली शर्त को खाली छोड़ देता है। इसलिए भर्ती नागरिकता का कोई पड़ाव नहीं, श्रम-बाज़ार का हिस्सा है।
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जापान में कहीं भर्ती, कहीं सिर्फ़ पंजीकरण, कहीं संविधान में लिखा कर्तव्य भर कैसे मनाया जाता है?
जापान में अनिवार्य सैन्य भर्ती नहीं है, और इसका कारण नीति से कम, संविधान के पाठ से अधिक जुड़ा है। अनुच्छेद 9 कहता है कि जापानी जनता राष्ट्र के संप्रभु अधिकार के रूप में युद्ध को, तथा अंतरराष्ट्रीय विवाद सुलझाने के साधन के रूप में बल की धमकी या प्रयोग को, सदा के लिए त्यागती है; और फिर: "उपर्युक्त उद्देश्य की पूर्ति के लिए थल, जल और वायु सेनाएँ तथा अन्य युद्ध-क्षमता कभी नहीं रखी जाएँगी। राज्य का युद्ध करने का अधिकार मान्य नहीं होगा।" जहाँ बाक़ी छह बाज़ार लिखते हैं कि कौन कितने वर्ष सेवा करेगा, वहाँ जापान का आरंभ-बिंदु यह है कि रखा ही क्या नहीं जाएगा। व्यवहार में रक्षा का काम आत्म-रक्षा बल करता है, जो अपने अलग क़ानून के तहत है, और उसके सदस्य आवेदन देकर भर्ती होते हैं — राज्य व्यक्ति को बुलाता नहीं, व्यक्ति आवेदन करता है। संविधान में नागरिकों पर सैन्य सेवा का कर्तव्य डालने वाला कोई अनुच्छेद नहीं है।
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ताइवान में कहीं भर्ती, कहीं सिर्फ़ पंजीकरण, कहीं संविधान में लिखा कर्तव्य भर कैसे मनाया जाता है?
ताइवान के सैन्य सेवा अधिनियम की धारा 1 एक ही वाक्य है: चीन गणराज्य के हर पुरुष नागरिक पर क़ानूनन सैन्य सेवा का कर्तव्य है। धारा 3 वर्षों की सीमा बाँधती है — दायित्व अठारह वर्ष पूरा करने के अगले वर्ष की 1 जनवरी से शुरू होता है और छत्तीस वर्ष वाले वर्ष की 31 दिसंबर को समाप्त। हाल के वर्षों में सबसे चर्चित धारा 16 है: भर्ती-योग्य आयु के पुरुषों की सक्रिय सेवा एक वर्ष की होती है, जिसके बाद विमुक्ति मिलती है; दूसरा रास्ता चार महीने तक का सैन्य प्रशिक्षण है। उसी धारा में एक असामान्य व्यवस्था भी है: उच्चतर माध्यमिक या उससे ऊपर उत्तीर्ण सैन्य प्रशिक्षण अथवा राष्ट्रीय-रक्षा शिक्षा के पाठ्यक्रम आठ कक्षाओं के बदले एक दिन की दर से सेवा-अवधि से घटाए जा सकते हैं — सक्रिय सेवा में अधिकतम तीस दिन और प्रशिक्षण में पंद्रह। यानी कक्षा में बिताए घंटे बैरक के दिनों से बदले जा सकते हैं। धारा 2 सेवा को अफ़सर, कनिष्ठ अधिकारी, सैनिक और वैकल्पिक सेवा में बाँटती है, और वैकल्पिक सेवा अपवाद नहीं, सामान्य रास्ता है।
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संयुक्त राज्य में कहीं भर्ती, कहीं सिर्फ़ पंजीकरण, कहीं संविधान में लिखा कर्तव्य भर कैसे मनाया जाता है?
अमेरिका ने 1973 के बाद वास्तव में किसी की भर्ती नहीं की, पर दायित्व समाप्त नहीं हुआ — वह सिमटकर एक ही क्रिया रह गया। 50 U.S.C. §3802 कहता है कि, जब तक इस अध्याय में अन्यथा न कहा गया हो, पंजीकरण के लिए नियत दिनों पर अठारह से छब्बीस वर्ष के बीच के हर पुरुष नागरिक का, तथा अमेरिका में रहने वाले हर अन्य पुरुष का यह कर्तव्य होगा कि वह राष्ट्रपति की उद्घोषणा और उसके अधीन बने नियमों द्वारा तय समय, स्थान और तरीक़े से स्वयं उपस्थित होकर पंजीकरण कराए; अनिवासी दर्जे पर वैध रूप से आए विदेशी, उस दर्जे को बनाए रखने तक, इससे बाहर हैं। पूरी धारा की क्रिया "सेवा करना" नहीं, "पंजीकरण कराना" है। इससे अमेरिका इन सात बाज़ारों में अकेला है जहाँ दायित्व सूची पर आकर रुक जाता है: सूची अद्यतन होती रहती है, पर बुलावे का स्विच कांग्रेस को अलग से दबाना पड़ता है। पंजीकरण न कराने का असर केवल दंड नहीं — वह छात्र सहायता, संघीय नौकरियों और कुछ राज्यों में ड्राइविंग लाइसेंस तक से जुड़ा है।
स्रोत और तारीख़ें
तारीख़ें स्थानीय समय, कैलेंडर और आधिकारिक सूचनाओं पर आधारित हैं। अनुमानित या स्थानीय तारीख़ के लिए स्रोत देखें।