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विषय: कहीं भर्ती, कहीं सिर्फ़ पंजीकरण, कहीं संविधान में लिखा कर्तव्य भर

इंडोनेशिया में कहीं भर्ती, कहीं सिर्फ़ पंजीकरण, कहीं संविधान में लिखा कर्तव्य भर कैसे मनाया जाता है?

रोज़मर्रा का विषय

इंडोनेशिया के 1945 के संविधान का अनुच्छेद 30(1) असामान्य ढंग से लिखा गया है: हर नागरिक को राष्ट्र की रक्षा और सुरक्षा के प्रयास में भाग लेने का अधिकार भी है और कर्तव्य भी। अधिकार और कर्तव्य को एक ही वाक्य में रखना इन सात संविधानों में अकेला उदाहरण है। खंड (2) फिर तरीक़ा बताता है — रक्षा और सुरक्षा समग्र जन-रक्षा एवं सुरक्षा प्रणाली (sishankamrata) से चलाई जाएगी, जिसमें इंडोनेशियाई राष्ट्रीय सशस्त्र बल और राष्ट्रीय पुलिस मुख्य शक्ति होंगे तथा जनता सहायक शक्ति; खंड (3) जोड़ता है कि सशस्त्र बल थल, जल और वायु सेना से बने हैं। यानी रचना "व्यक्तियों को सेना में भर्ती करने" की नहीं, "पूरी आबादी को सहायक भूमिका में रखने" की है। यह ताइवान और चीन की उन व्यवस्थाओं से बिलकुल अलग है जो आयु और सेवा-अवधि पर टिकी हैं: न अनिवार्य भर्ती है, न ऐसा कोई कालखंड जिससे सबको गुज़रना हो — फिर भी संविधान हर व्यक्ति को उस प्रणाली में लिख देता है।

यह विषय क्या है?

ताइवान के सैन्य सेवा अधिनियम की धारा 1 एक ही वाक्य है — हर पुरुष नागरिक पर सेवा का कर्तव्य है — और धारा 16 सक्रिय भर्ती-सेवा को एक वर्ष तय करती है। चीन का संविधान सैन्य सेवा को "गौरवपूर्ण दायित्व" कहता है। ब्राज़ील का संविधान इसे अनिवार्य बताता है, फिर अंतरात्मा के आधार पर वैकल्पिक सेवा देता है और शांतिकाल में महिलाओं तथा धर्माचार्यों को छूट देता है। अमेरिका और भी अजीब है: 50 U.S.C. §3802 अठारह से छब्बीस वर्ष के पुरुषों से पंजीकरण माँगता है, पर बुलाया लगभग किसी को नहीं जाता। जापान का संविधान थल, जल और वायु सेना रखता ही नहीं। इंडोनेशिया और भारत दोनों संविधान में रक्षा का कर्तव्य लिखते हैं और दोनों में अनिवार्य भर्ती नहीं है।

स्रोत और तारीख़ें

तारीख़ें स्थानीय समय, कैलेंडर और आधिकारिक सूचनाओं पर आधारित हैं। अनुमानित या स्थानीय तारीख़ के लिए स्रोत देखें।