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विषय: कहीं भर्ती, कहीं सिर्फ़ पंजीकरण, कहीं संविधान में लिखा कर्तव्य भर

चीन में कहीं भर्ती, कहीं सिर्फ़ पंजीकरण, कहीं संविधान में लिखा कर्तव्य भर कैसे मनाया जाता है?

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चीन रक्षा को संविधान के उस अध्याय में लिखता है जो नागरिकों के कर्तव्य गिनाता है। अनुच्छेद 55 दो वाक्यों का है और दोनों का स्वर अलग है। पहला: मातृभूमि की रक्षा और आक्रमण का प्रतिरोध चीन जनवादी गणराज्य के हर नागरिक का पवित्र कर्तव्य है। दूसरा: क़ानून के अनुसार सैन्य सेवा करना और मिलिशिया संगठन में शामिल होना नागरिकों का गौरवपूर्ण दायित्व है। पहले वाक्य में न लिंग की सीमा है न आयु की, और न ही कोई निश्चित कार्य बताया गया है; संस्थाओं तक दूसरा वाक्य ही उतरता है, और वह मिलिशिया को सेना के साथ रखता है — रक्षा का वाहक केवल सेना नहीं है। दायित्व को "अनिवार्य" नहीं बल्कि "गौरवपूर्ण" कहना ताइवान के सैन्य सेवा अधिनियम की धारा 1 से स्वर का सबसे स्पष्ट अंतर है: एक इसे सम्मान की तरह लिखता है, दूसरा क़ानूनी ज़िम्मेदारी की तरह। वास्तविक भर्ती, आयु और सेवा-अवधि सैन्य सेवा क़ानून तय करता है।

यह विषय क्या है?

ताइवान के सैन्य सेवा अधिनियम की धारा 1 एक ही वाक्य है — हर पुरुष नागरिक पर सेवा का कर्तव्य है — और धारा 16 सक्रिय भर्ती-सेवा को एक वर्ष तय करती है। चीन का संविधान सैन्य सेवा को "गौरवपूर्ण दायित्व" कहता है। ब्राज़ील का संविधान इसे अनिवार्य बताता है, फिर अंतरात्मा के आधार पर वैकल्पिक सेवा देता है और शांतिकाल में महिलाओं तथा धर्माचार्यों को छूट देता है। अमेरिका और भी अजीब है: 50 U.S.C. §3802 अठारह से छब्बीस वर्ष के पुरुषों से पंजीकरण माँगता है, पर बुलाया लगभग किसी को नहीं जाता। जापान का संविधान थल, जल और वायु सेना रखता ही नहीं। इंडोनेशिया और भारत दोनों संविधान में रक्षा का कर्तव्य लिखते हैं और दोनों में अनिवार्य भर्ती नहीं है।

स्रोत और तारीख़ें

तारीख़ें स्थानीय समय, कैलेंडर और आधिकारिक सूचनाओं पर आधारित हैं। अनुमानित या स्थानीय तारीख़ के लिए स्रोत देखें।