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विषय: किराये की जमानत राशि और मकान-मालिक की ताक़त: कितने महीने, और कितनी आसानी से किराया समाप्त कर सकता है

भारत में नियम क्या है?

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भारत के संविधान में "आवास" राज्य सूची का विषय है, इसलिए कोई एक राष्ट्रीय किरायेदारी क़ानून नहीं है — केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत मॉडल टेनेंसी एक्ट, 2021 केवल एक नमूना क़ानून है जिसे राज्य अपना सकते हैं, बदल सकते हैं, या नज़रअंदाज़ कर सकते हैं। यह आवासीय परिसरों के लिए दो महीने और वाणिज्यिक के लिए छह महीने की जमानत-राशि सीमा प्रस्तावित करता है, हस्ताक्षर के दो महीने के भीतर नए बने रेंट अथॉरिटी के पास लिखित अनुबंध दर्ज कराने की माँग करता है, और सामान्य दीवानी अदालतों से तेज़ी से विवाद सुलझाने के लिए तीन-स्तरीय व्यवस्था — रेंट अथॉरिटी, फिर रेंट कोर्ट, फिर रेंट ट्रिब्यूनल — बनाता है। अब तक केवल उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, असम और तमिलनाडु जैसे कुछ ही राज्यों ने इस मॉडल के मोटे तौर पर अनुरूप क़ानून पारित किए हैं। देश का अधिकांश हिस्सा अब भी अपने पुराने, राज्य-विशिष्ट किराया नियंत्रण क़ानूनों (Rent Control Acts) पर चलता है, जिनमें से कुछ 1940-60 के दशक के हैं; इन क़ानूनों ने कई राज्यों में लंबे समय से रह रहे किरायेदारों का किराया बाज़ार भाव से कहीं नीचे जमा दिया — इसे मौजूदा किरायेदारों की सुरक्षा माना जाता है, पर इसे मकान-मालिकों के किराया बाज़ार से हट जाने या नियंत्रित दर पर किराये पर देने के बजाय मकान ख़ाली छोड़ देने का कारण भी बताया जाता है। यही इतिहास है जिसके कारण नया मॉडल क़ानून किराया-सीमा फिर से लागू करने के बजाय मकान-मालिक और किरायेदार के बीच किराया तय करने को उदार बनाने और तेज़ विवाद-निपटान मंच जोड़ने की ओर झुका है।

यह विषय क्या है?

ताइवान के आवासीय किराया बाज़ार विकास एवं प्रबंधन अधिनियम की धारा 7 जमानत राशि को किराये के दो महीनों तक सीमित करती है, और धारा 10 पाँच ऐसी स्थितियाँ गिनाती है जिनमें मकान-मालिक अनुबंध जल्दी समाप्त कर सकता है — चार में तीस दिन का लिखित नोटिस चाहिए, पुनर्निर्माण के लिए मकान वापस लेने में तीन महीने का।

चीन के आवासीय किराया विनियमन (राज्य परिषद आदेश संख्या 812, 15 सितंबर 2025 से लागू) की धारा 10 केवल यह माँगती है कि जमानत राशि, वापसी का समय और कटौती की शर्तें अनुबंध में लिखी हों — यह कोई ऊपरी सीमा तय नहीं करती।

जापान की नागरिक संहिता की धारा 622-2 के तहत मकान-मालिक को किराया समाप्त होने और मकान वापस मिलने पर बकाया राशि काटकर शिकिकिन (जमानत राशि) लौटानी होती है; इसके अलावा जापान में रेइकिन नाम की प्रथा है — मकान-मालिक को दिया जाने वाला उपहार-धन, जो आमतौर पर वापस नहीं होता और जिसे कोई क़ानून न तो अनिवार्य करता है न सीमित करता है — जबकि भूमि एवं भवन पट्टा अधिनियम की धारा 28 नवीनीकरण से इनकार करने या अनुबंध समाप्त करने के लिए "उचित कारण" माँगती है, इसलिए किरायेदार को बिना वजह नहीं निकाला जा सकता।

अमेरिका में कोई संघीय नियम है ही नहीं — HUD की भूमिका केवल Fair Housing Act के तहत भेदभाव-रोधी मामलों तक सीमित है, और जमानत राशि की सीमा हर राज्य अपने हिसाब से तय करता है; कैलिफ़ोर्निया की नागरिक संहिता धारा 1950.5, जुलाई 2024 से लागू AB 12 संशोधन के बाद, दो-तीन महीनों की पुरानी सीमा को घटाकर एक महीने पर ले आई।

भारत का मॉडल टेनेंसी एक्ट, 2021 राज्यों के अपनाने के लिए महज़ एक नमूना क़ानून है — यह आवासीय के लिए दो महीने और वाणिज्यिक के लिए छह महीने की सीमा प्रस्तावित करता है, पर अधिकांश राज्य अब भी अपने पुराने किराया नियंत्रण क़ानूनों पर चलते हैं।

इंडोनेशिया का किराया क़ानून अब भी डच-युगीन नागरिक संहिता (अनुच्छेद 1548 से आगे) पर टिका है; जमानत राशि पूरी तरह पक्षों के समझौते पर छोड़ी गई है, और किरायेदार के इनकार करने पर मकान-मालिक अदालत की प्रक्रिया के बिना उसे नहीं निकाल सकता।

ब्राज़ील के किरायेदारी क़ानून की धारा 38 जमानत राशि को किराये के तीन महीनों तक सीमित करती है और उसे बचत खाते में रखना अनिवार्य करती है; धारा 46 के तहत तीस महीने या उससे अधिक के अनुबंध की अवधि पूरी होने पर मकान-मालिक बिना कारण बताए मकान वापस ले सकता है।

स्रोत और तारीख़ें

तारीख़ें स्थानीय समय, कैलेंडर और आधिकारिक सूचनाओं पर आधारित हैं। अनुमानित या स्थानीय तारीख़ के लिए स्रोत देखें।