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विषय: किराये की जमानत राशि और मकान-मालिक की ताक़त: कितने महीने, और कितनी आसानी से किराया समाप्त कर सकता है

इंडोनेशिया में नियम क्या है?

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इंडोनेशिया का किरायेदारी क़ानून आज भी डच-युगीन नागरिक संहिता (KUHPerdata, 1847 में घोषित) पर टिका है, जिसकी पुस्तक III, अध्याय VII, अनुच्छेद 1548 से 1600 तक "सेवा-मेन्येवा" (किराया) को नियंत्रित करते हैं। जमानत राशि स्वयं बिल्कुल भी विनियमित नहीं है — कोई लेगा या नहीं, और कितना लेगा, यह पूरी तरह मकान-मालिक और किरायेदार के बीच अनुबंध में तय होता है, ताइवान की क़ानूनी दो-महीने सीमा के विपरीत। इंडोनेशियाई बाज़ार को बाक़ी छह देशों से सबसे अलग बनाने वाली चीज़ जमानत राशि नहीं बल्कि भुगतान की समय-लय है: घर किराये पर देने (अपार्टमेंट के विपरीत) में परंपरागत रूप से पूरे साल का किराया एकमुश्त दिया जाता है, और पारिवारिक घरों में दो-तीन साल का एकमुश्त अग्रिम भुगतान भी आम है — न कि बाक़ी जगहों की तरह मासिक भुगतान मान लिया जाता है। नागरिक संहिता यह सिद्धांत भी स्थापित करती है कि बिक्री किराये को समाप्त नहीं करती (अनुच्छेद 1576): यदि मकान-मालिक किरायेदारी के बीच में घर बेच देता है, तो नया मालिक मौजूदा किराया-अनुबंध को अपनाने के लिए बाध्य है और मकान जल्दी वापस पाने के लिए किरायेदार को नहीं निकाल सकता, जब तक मूल अनुबंध में अन्यथा न लिखा हो। और मकान-मालिक केवल ताला बदलकर घर वापस नहीं ले सकता — यदि अवधि पूरी होने पर किरायेदार जगह खाली करने से इनकार करता है, तो मकान-मालिक को दीवानी मुक़दमा दायर कर, लागू करने योग्य अदालती फ़ैसला लेना होगा, तभी किरायेदार को बलपूर्वक हटाया जा सकता है — ख़ुद से निकालना कोई क़ानूनी शॉर्टकट नहीं है।

यह विषय क्या है?

ताइवान के आवासीय किराया बाज़ार विकास एवं प्रबंधन अधिनियम की धारा 7 जमानत राशि को किराये के दो महीनों तक सीमित करती है, और धारा 10 पाँच ऐसी स्थितियाँ गिनाती है जिनमें मकान-मालिक अनुबंध जल्दी समाप्त कर सकता है — चार में तीस दिन का लिखित नोटिस चाहिए, पुनर्निर्माण के लिए मकान वापस लेने में तीन महीने का।

चीन के आवासीय किराया विनियमन (राज्य परिषद आदेश संख्या 812, 15 सितंबर 2025 से लागू) की धारा 10 केवल यह माँगती है कि जमानत राशि, वापसी का समय और कटौती की शर्तें अनुबंध में लिखी हों — यह कोई ऊपरी सीमा तय नहीं करती।

जापान की नागरिक संहिता की धारा 622-2 के तहत मकान-मालिक को किराया समाप्त होने और मकान वापस मिलने पर बकाया राशि काटकर शिकिकिन (जमानत राशि) लौटानी होती है; इसके अलावा जापान में रेइकिन नाम की प्रथा है — मकान-मालिक को दिया जाने वाला उपहार-धन, जो आमतौर पर वापस नहीं होता और जिसे कोई क़ानून न तो अनिवार्य करता है न सीमित करता है — जबकि भूमि एवं भवन पट्टा अधिनियम की धारा 28 नवीनीकरण से इनकार करने या अनुबंध समाप्त करने के लिए "उचित कारण" माँगती है, इसलिए किरायेदार को बिना वजह नहीं निकाला जा सकता।

अमेरिका में कोई संघीय नियम है ही नहीं — HUD की भूमिका केवल Fair Housing Act के तहत भेदभाव-रोधी मामलों तक सीमित है, और जमानत राशि की सीमा हर राज्य अपने हिसाब से तय करता है; कैलिफ़ोर्निया की नागरिक संहिता धारा 1950.5, जुलाई 2024 से लागू AB 12 संशोधन के बाद, दो-तीन महीनों की पुरानी सीमा को घटाकर एक महीने पर ले आई।

भारत का मॉडल टेनेंसी एक्ट, 2021 राज्यों के अपनाने के लिए महज़ एक नमूना क़ानून है — यह आवासीय के लिए दो महीने और वाणिज्यिक के लिए छह महीने की सीमा प्रस्तावित करता है, पर अधिकांश राज्य अब भी अपने पुराने किराया नियंत्रण क़ानूनों पर चलते हैं।

इंडोनेशिया का किराया क़ानून अब भी डच-युगीन नागरिक संहिता (अनुच्छेद 1548 से आगे) पर टिका है; जमानत राशि पूरी तरह पक्षों के समझौते पर छोड़ी गई है, और किरायेदार के इनकार करने पर मकान-मालिक अदालत की प्रक्रिया के बिना उसे नहीं निकाल सकता।

ब्राज़ील के किरायेदारी क़ानून की धारा 38 जमानत राशि को किराये के तीन महीनों तक सीमित करती है और उसे बचत खाते में रखना अनिवार्य करती है; धारा 46 के तहत तीस महीने या उससे अधिक के अनुबंध की अवधि पूरी होने पर मकान-मालिक बिना कारण बताए मकान वापस ले सकता है।

स्रोत और तारीख़ें

तारीख़ें स्थानीय समय, कैलेंडर और आधिकारिक सूचनाओं पर आधारित हैं। अनुमानित या स्थानीय तारीख़ के लिए स्रोत देखें।