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विषय: बच्चा होने के बाद क़ानून आपको कितने दिन देता है

भारत में बच्चा होने के बाद क़ानून आपको कितने दिन देता है कैसे मनाया जाता है?

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भारत ने मातृत्व-संरक्षण को संविधान में रखा, पर एक ख़ास जगह पर। अनुच्छेद 42 राज्य की नीति के निदेशक तत्वों वाले भाग में है और कहता है: राज्य काम की न्यायसंगत और मानवोचित दशाओं तथा प्रसूति सहायता के लिए उपबंध करेगा। पेच उसी भाग के अनुच्छेद 37 में है: इस भाग में अंतर्विष्ट उपबंध किसी न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं होंगे, फिर भी उनमें रखे तत्व देश के शासन में मूलभूत हैं और क़ानून बनाते समय उन्हें लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा। यानी प्रसूति सहायता वह कार्यभार है जो संविधान विधायिका को सौंपता है, अदालत में माँगा जा सकने वाला अधिकार नहीं — और यह बात साफ़-साफ़ कहने वाला पाठ स्वयं संविधान है। बाक़ी छह बाज़ार इससे अलग हैं: वहाँ अवकाश श्रम-क़ानूनों में बैठा है और दिन, वेतन तथा दंड सीधे माँगे जा सकते हैं। इसलिए भारत में असल में क्या मिलता है, यह उसके बाद बने क़ानूनों पर और उनके दायरे पर निर्भर करता है, अनुच्छेद 42 पर नहीं।

यह विषय क्या है?

ताइवान का श्रम मानक अधिनियम आठ सप्ताह का मातृत्व अवकाश देता है, और छह महीने की सेवा के बाद पूरा वेतन भी। जापान का क़ानून दूसरी दिशा में जाता है: धारा 65 नियोक्ता को मना करती है कि वह प्रसव के आठ सप्ताह तक स्त्री से काम कराए — यह अधिकार नहीं, निषेध है। ब्राज़ील का श्रम-विधि संग्रह 120 दिन तय करता है। इंडोनेशिया का 2024 का चौथा क़ानून कम से कम तीन महीने और ज़रूरत पड़ने पर तीन और देता है, तथा वेतन का प्रतिशत महीने-दर-महीने लिखता है। अमेरिका का FMLA साफ़ शब्दों में कहता है कि यह अवकाश "अवैतनिक हो सकता है"। और भारत तो और भी अलग है।

स्रोत और तारीख़ें

तारीख़ें स्थानीय समय, कैलेंडर और आधिकारिक सूचनाओं पर आधारित हैं। अनुमानित या स्थानीय तारीख़ के लिए स्रोत देखें।