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विषय: अनिवार्य शिक्षा: किस उम्र से किस उम्र तक — और यह "कर्तव्य" किसका है

ताइवान में अनिवार्य शिक्षा: किस उम्र से किस उम्र तक — और यह "कर्तव्य" किसका है कैसे मनाया जाता है?

रोज़मर्रा का विषय

ताइवान की अनिवार्य शिक्षा जन-शिक्षा अधिनियम की धारा 3 में है: छह से पंद्रह वर्ष के नागरिक जन-शिक्षा प्राप्त करेंगे, और अनिवार्य नामांकन अलग क़ानून द्वारा नियत होगा। नौ वर्ष; धारा 4 उन्हें छह वर्ष प्राथमिक और तीन वर्ष जूनियर हाई में बाँटती है। "अलग क़ानून" वाला वह आधा वाक्य ध्यान देने योग्य है — क़ानून पहले घोषित करता है कि शिक्षा ली जानी चाहिए, फिर उसे बाध्य कैसे करना है यह पूरी तरह किसी दूसरे क़ानून को सौंप देता है। कर्तव्य और प्रवर्तन-तंत्र को दो अलग क़ानूनों में बाँटना इन सात बाज़ारों में असामान्य है: अधिकांश या तो केवल आयु बताते हैं (ब्राज़ील, भारत), या कर्तव्य किसी नामित पक्ष पर डालते हैं (जापान में अभिभावक, चीन में स्वयं नागरिक)। धारा 5 कहती है कि जन-शिक्षा मूलतः सरकार देगी और निजी प्रयास को प्रोत्साहन मिलेगा, और धारा 6 प्रायोगिक शिक्षा को संभालती है — यानी एक ही अधिनियम में "पढ़ना अनिवार्य है" और "परंपरागत स्कूल में ही होना ज़रूरी नहीं" दोनों साथ रहते हैं।

यह विषय क्या है?

ताइवान का जन-शिक्षा अधिनियम छह से पंद्रह वर्ष, यानी नौ साल तय करता है, और अनिवार्य नामांकन को अलग क़ानून पर छोड़ता है। ब्राज़ील का अनुच्छेद 208, 2009 के संशोधन के बाद, चार से सत्रह वर्ष तक चलता है — सातों में सबसे लंबा। भारत का अनुच्छेद 21A छह से चौदह वर्ष को कवर करता है और मूल अधिकारों वाले भाग में बैठा है, इसलिए उसे अदालत में ले जाया जा सकता है। इंडोनेशिया का अनुच्छेद 31(2) कर्तव्य को दोनों ओर रखता है: नागरिक को बुनियादी शिक्षा लेनी होगी और सरकार को उसका ख़र्च उठाना होगा; एक और खंड बजट का कम से कम बीस प्रतिशत शिक्षा के लिए रखता है। जापान का अनुच्छेद 26 कर्तव्य अभिभावकों पर डालता है। चीन का अनुच्छेद 46 एक ही वाक्य में शिक्षा को अधिकार भी बनाता है और कर्तव्य भी। अमेरिका में कोई संघीय नियम है ही नहीं — हर राज्य अपनी शुरुआत और अंत की उम्र ख़ुद तय करता है।

स्रोत और तारीख़ें

तारीख़ें स्थानीय समय, कैलेंडर और आधिकारिक सूचनाओं पर आधारित हैं। अनुमानित या स्थानीय तारीख़ के लिए स्रोत देखें।