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विषय: धर्म और राज्य: संविधान दोनों के बीच कितनी दूरी रखता है

भारत में धर्म और राज्य: संविधान दोनों के बीच कितनी दूरी रखता है कैसे मनाया जाता है?

रोज़मर्रा का विषय

भारत का संविधान अपनी प्रस्तावना में ही गणराज्य को पंथनिरपेक्ष कहता है — संप्रभु समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य — पर वह पंथनिरपेक्षता अमेरिकी "दीवार" जैसी नहीं है। देखने की जगह अनुच्छेद 25(1) की शब्दावली है: लोक व्यवस्था, सदाचार और स्वास्थ्य तथा इस भाग के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए, सभी व्यक्तियों को अंत:करण की स्वतंत्रता तथा धर्म को अबाध रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने का समान अधिकार होगा। उस अंतिम क्रिया पर ध्यान दें: प्रचार। अपने धर्म के प्रसार की स्वतंत्रता को संविधान में ही लिख देना इन सातों में अकेला उदाहरण है — और जगह जो सुरक्षित है वह है मानना या न मानना, संस्कारों में भाग लेना या न लेना; भारत उसमें दूसरों तक पहुँचाना भी जोड़ता है। साथ ही अनुच्छेद 25 के आरंभ की सीमाओं की कतार उसी वाक्य में है। यानी भारत की रचना धर्म को दूर धकेलने की नहीं, बल्कि उसे सार्वजनिक क्षेत्र में रखकर उसकी सीमाएँ मद-दर-मद अंकित करने की है।

यह विषय क्या है?

इंडोनेशिया के संविधान के अनुच्छेद 29 की पहली ही पंक्ति है कि राज्य एकमेव ईश्वर में आस्था पर आधारित है। ब्राज़ील का अनुच्छेद 19 उल्टी दिशा में चलता है और संघ, राज्यों तथा नगरपालिकाओं को धर्म स्थापित करने, उन्हें अनुदान देने, या उनसे निर्भरता अथवा गठबंधन का संबंध रखने से रोकता है। जापान का अनुच्छेद 20 और बारीक़ है — किसी धार्मिक संगठन को राज्य से विशेषाधिकार नहीं मिलेंगे, और राज्य तथा उसके अंग धार्मिक शिक्षा या किसी भी धार्मिक गतिविधि से दूर रहेंगे — जबकि अनुच्छेद 89 सार्वजनिक धन को धार्मिक निकायों तक जाने से रोकता है। अमेरिका का पहला संशोधन कहता है कि कांग्रेस धर्म की स्थापना संबंधी कोई क़ानून नहीं बनाएगी। चीन का अनुच्छेद 36 आस्था की स्वतंत्रता देता है पर संरक्षण "सामान्य" धार्मिक गतिविधियों को देता है। भारत की प्रस्तावना गणराज्य को पंथनिरपेक्ष कहती है, और अनुच्छेद 25 धर्म के *प्रचार* को भी स्वतंत्रता में गिनता है। ताइवान का अनुच्छेद 13 केवल एक वाक्य है।

स्रोत और तारीख़ें

तारीख़ें स्थानीय समय, कैलेंडर और आधिकारिक सूचनाओं पर आधारित हैं। अनुमानित या स्थानीय तारीख़ के लिए स्रोत देखें।