विषय: धर्म और राज्य: संविधान दोनों के बीच कितनी दूरी रखता है
चीन में धर्म और राज्य: संविधान दोनों के बीच कितनी दूरी रखता है कैसे मनाया जाता है?
रोज़मर्रा का विषय
चीन के संविधान के अनुच्छेद 36 की बनावट वाक्य-दर-वाक्य पढ़ने लायक़ है, क्योंकि हर वाक्य एक और शर्त जोड़ता है। पहला स्वतंत्रता देता है: चीन जनवादी गणराज्य के नागरिकों को धार्मिक आस्था की स्वतंत्रता है। दूसरा दोनों दिशाओं में बाध्यता मना करता है: कोई राज्य-अंग, सामाजिक संगठन या व्यक्ति नागरिकों को किसी धर्म में विश्वास करने या न करने के लिए बाध्य नहीं कर सकता, न ही विश्वास करने या न करने वालों से भेदभाव कर सकता है — अविश्वास को विश्वास के समान संरक्षण देना इन सात संविधानों में असामान्य है। तीसरा शर्त जोड़ता है: राज्य सामान्य धार्मिक गतिविधियों की रक्षा करता है, और कोई भी धर्म का उपयोग करके सामाजिक व्यवस्था भंग करने, नागरिकों के स्वास्थ्य को हानि पहुँचाने या राज्य की शिक्षा-प्रणाली में बाधा डालने वाली गतिविधि नहीं कर सकता। चौथा बाहर की ओर देखता है: धार्मिक निकाय और धार्मिक मामले किसी विदेशी प्रभुत्व के अधीन नहीं हैं।
यह विषय क्या है?
इंडोनेशिया के संविधान के अनुच्छेद 29 की पहली ही पंक्ति है कि राज्य एकमेव ईश्वर में आस्था पर आधारित है। ब्राज़ील का अनुच्छेद 19 उल्टी दिशा में चलता है और संघ, राज्यों तथा नगरपालिकाओं को धर्म स्थापित करने, उन्हें अनुदान देने, या उनसे निर्भरता अथवा गठबंधन का संबंध रखने से रोकता है। जापान का अनुच्छेद 20 और बारीक़ है — किसी धार्मिक संगठन को राज्य से विशेषाधिकार नहीं मिलेंगे, और राज्य तथा उसके अंग धार्मिक शिक्षा या किसी भी धार्मिक गतिविधि से दूर रहेंगे — जबकि अनुच्छेद 89 सार्वजनिक धन को धार्मिक निकायों तक जाने से रोकता है। अमेरिका का पहला संशोधन कहता है कि कांग्रेस धर्म की स्थापना संबंधी कोई क़ानून नहीं बनाएगी। चीन का अनुच्छेद 36 आस्था की स्वतंत्रता देता है पर संरक्षण "सामान्य" धार्मिक गतिविधियों को देता है। भारत की प्रस्तावना गणराज्य को पंथनिरपेक्ष कहती है, और अनुच्छेद 25 धर्म के *प्रचार* को भी स्वतंत्रता में गिनता है। ताइवान का अनुच्छेद 13 केवल एक वाक्य है।
स्रोत और तारीख़ें
तारीख़ें स्थानीय समय, कैलेंडर और आधिकारिक सूचनाओं पर आधारित हैं। अनुमानित या स्थानीय तारीख़ के लिए स्रोत देखें।