विषय: आदिवासी स्मृति और औपनिवेशिक इतिहास
ताइवान में आदिवासी स्मृति और औपनिवेशिक इतिहास कैसे मनाया जाता है?
原住民族抵抗日
- स्थानीय तारीख़
- 26 जून 2027
आदिवासी प्रतिरोध दिवस ताइवानी क़ानून में 2025 में ही आया। उससे पहले वहाँ के स्मृति-दिवस और पर्व गृह मंत्रालय के आठ-अनुच्छेद वाले नियम पर टिके थे — एक प्रशासनिक आदेश, जो फिर भी देश के हर सरकारी और निजी निकाय, विद्यालय और संगठन को बाँधता था; विधायी युआन की एक शोध-रिपोर्ट ने इसकी विधिक हैसियत को उसके प्रभाव के मुक़ाबले बहुत नीचा बताते हुए इसे अधिनियम बनाने की सिफ़ारिश की थी। 28 मई 2025 को राष्ट्रपति-आदेश से प्रख्यापित दस-अनुच्छेदों वाला स्मृति-दिवस एवं पर्व अधिनियम धारा 3(8) में लिखता है: "आदिवासी प्रतिरोध दिवस: 26 जून"। उसी धारा में 21 मार्च का जातीय समता स्मृति दिवस और 1 अगस्त का आदिवासी दिवस भी हैं — एक ही क़ानून में तीन संबंधित स्मृति-दिवस, तीनों पर छुट्टी नहीं। इस विधान ने छुट्टी वहाँ बढ़ाई जहाँ स्मृति-दिवस नहीं थे: आदिवासी वार्षिक अनुष्ठानों का अवकाश एक दिन से तीन दिन कर दिया गया।
原住民族日
- स्थानीय तारीख़
- 1 अगस्त 2027
ताइवान में यह दिन स्मृति-दिवस है, अवकाश नहीं। स्मृति-दिवस एवं पर्व अधिनियम की धारा 3(10) 1 अगस्त को आदिवासी दिवस निर्धारित करती है, पर धारा 4 सवेतन स्मृति-दिवसों को छह तक सीमित रखती है — गणराज्य स्थापना दिवस, शांति स्मृति दिवस, कन्फ़्यूशियस जयंती, राष्ट्रीय दिवस, ताइवान प्रत्यावर्तन एवं गुनिंगतौ विजय दिवस, और संविधान दिवस — और अंत में लिखती है: "शेष सभी पर अवकाश नहीं"। तारीख़ एक संविधान संशोधन की ओर इशारा करती है: 1 अगस्त 1994 को प्रकाशित अतिरिक्त अनुच्छेदों ने चालीस वर्षों से चले आ रहे "शानबाओ" (पर्वतीय बंधु) को हटाकर "युआनजूमिन" (मूल निवासी) किया, और 1997 के चौथे संशोधन ने सामूहिक रूप "आदिवासी जन" को संविधान में जोड़ा। कार्यपालिका युआन ने 2005 में मसौदा पारित करते समय यही तारीख़ तय की, और 1 अगस्त 2016 को राष्ट्राध्यक्ष ने आदिवासी जनों से क्षमा माँगी। असली छुट्टी कहीं और है: उसी अधिनियम की धारा 5 "आदिवासी वार्षिक अनुष्ठानों" को लोक-पर्वों में गिनती है, जिनकी तिथियाँ आदिवासी परिषद प्रत्येक समुदाय के रीति-रिवाज और गाँवों की राय लेकर अधिसूचित करती है, और धारा 6 पंजीकृत आदिवासी पहचान वाले व्यक्ति को अपने समुदाय के अनुष्ठान-पंचांग से तीन दिन चुनने देती है — ताइवान की एकमात्र ऐसी छुट्टी जो समुदाय के हिसाब से तय होती है और केवल उसी पहचान वालों को मिलती है। परिषद इस समय सोलह समुदायों को मान्यता देती है।
यह विषय क्या है?
भारत ने यह दिन एक व्यक्ति से बाँधा है: 2021 में, आज़ादी का अमृत महोत्सव के दौरान सरकार ने 15 नवंबर को बिरसा मुंडा की जयंती पर जनजातीय गौरव दिवस घोषित किया, और जनजातीय कार्य मंत्रालय इसे समारोह नहीं, नीति की तारीख़ की तरह चलाता है — 2021 में राँची का स्मारक संग्रहालय, 2023 में खूँटी से PM-JANMAN, 2024 में 150वीं जयंती। दूसरी जगहों पर कैलेंडर का एक ही खाना दो नामों के बीच बँटा है: अमेरिकी संघीय क़ानून आज भी कोलंबस डे लिखता है, साउथ डकोटा नेटिव अमेरिकन्स डे, और अलबामा एक ही पंक्ति में तीन नाम। ताइवान ने तीन स्मृति-दिवस क़ानून में लिखे और किसी पर छुट्टी नहीं दी, ब्राज़ील ने 2022 में नाम बदला, और जापान ने आदिवासी होने की मान्यता दी पर तारीख़ नहीं।
स्रोत और तारीख़ें
तारीख़ें स्थानीय समय, कैलेंडर और आधिकारिक सूचनाओं पर आधारित हैं। अनुमानित या स्थानीय तारीख़ के लिए स्रोत देखें।