विषय: मतदान आपसे क्या माँगता है — देश दर देश
भारत में मतदान आपसे क्या माँगता है — देश दर देश कैसे मनाया जाता है?
रोज़मर्रा का विषय
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 326 लोक सभा और हर राज्य विधान सभा के चुनावों को वयस्क मताधिकार पर खड़ा करता है: जो भी भारत का नागरिक है, निर्धारित तिथि पर अठारह वर्ष से कम आयु का नहीं है, और अनिवास, विकृतचित्तता, अपराध या भ्रष्ट-अवैध आचरण के आधार पर निरर्ह नहीं है, वह मतदाता के रूप में पंजीकृत होने का हक़दार है। 1949 में लिखा गया यह वाक्य उस समय असाधारण था — कई पुराने लोकतंत्र तब भी संपत्ति या साक्षरता से मतदाता छाँट रहे थे, जबकि भारत ने आज़ादी के आरंभ से ही दहलीज़ केवल आयु पर रखी। व्यवहार में इसका अर्थ है विशाल प्रशासनिक काम: निर्वाचन आयोग को देश के हर कोने तक मतदान केंद्र पहुँचाना पड़ता है, और हर मतदाता की उँगली पर अमिट स्याही का निशान लगता है — वही बैंगनी लकीर जो मतदान के बाद कई दिन तक हर जगह दिखती है।
यह विषय क्या है?
ब्राज़ील के संविधान का अनुच्छेद 14 अठारह से सत्तर वर्ष के नागरिकों के लिए मतदान को कर्तव्य बनाता है, और न जाने पर कारण बताना पड़ता है। ताइवान के जन-प्रतिनिधि चुनाव एवं प्रत्यावर्तन अधिनियम की धारा 17 कहती है कि मतदान अपने गृह-पंजीकरण वाले मतदान केंद्र पर ही होगा — वहाँ अनुपस्थित मतपत्र है ही नहीं, इसलिए चुनाव का दिन पूरे द्वीप की घर-वापसी बन जाता है। चीन का संविधान प्रत्यक्ष चुनाव को काउंटी और टाउनशिप स्तर तक सीमित रखता है। और अमेरिका में संघीय क़ानून चुनाव का दिन 'नवंबर के पहले सोमवार के बाद वाला मंगलवार' तय करता है — और वह दिन छुट्टी नहीं है।
स्रोत और तारीख़ें
तारीख़ें स्थानीय समय, कैलेंडर और आधिकारिक सूचनाओं पर आधारित हैं। अनुमानित या स्थानीय तारीख़ के लिए स्रोत देखें।