क्या भारत में मध्य-शरद और चंद्र-दर्शन होता है?
यहाँ यह पर्व नहीं मनाया जाता
भारत में मध्य-शरद पर्व नहीं है, पर वही पूर्णिमा यहाँ अपना नाम रखती है: शरद पूर्णिमा, जिसे महाराष्ट्र में कोजागिरी पूर्णिमा कहते हैं — आश्विन मास की पूर्णिमा की रात, प्रायः अक्टूबर में। रीति यह है कि रात भर जागकर लक्ष्मी की आराधना की जाए; 'कोजागिरी' का अर्थ ही है 'कौन जाग रहा है'। खीर को चाँदनी के नीचे रखा जाता है और अगले दिन प्रसाद के रूप में बाँटा जाता है, और कहा जाता है कि इस रात का चाँद अपनी सोलहों कलाओं सहित दिखता है। वही पूर्णिमा: एक ओर मिलन और मूनकेक, दूसरी ओर रतजगा और चाँदनी में रखा मीठा।
यह विषय क्या है?
एक ही पूर्णिमा के आसपास चार अलग तरीक़े: ताइवान और मुख्यभूमि चीन में छुट्टी, मूनकेक और परिवार का जुटना; चीन के यानबियान का कोरियाई समुदाय इसे चुसोक की तरह मनाता है जहाँ पहले क़ब्रों की सफ़ाई होती है; और जापान में छुट्टी नहीं — वहाँ यह खगोल और ऋतु की रात है, जहाँ राष्ट्रीय वेधशाला साफ़ कहती है कि 'शरद का चाँद' अक्सर उस रात का पूर्ण चंद्र नहीं होता।
स्रोत और तारीख़ें
तारीख़ें स्थानीय समय, कैलेंडर और आधिकारिक सूचनाओं पर आधारित हैं। अनुमानित या स्थानीय तारीख़ के लिए स्रोत देखें।