भारत में यह कैसे होता है?
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भारत 1969 के जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम के तहत चलता है, जिसमें मृत्यु की सूचना इक्कीस दिन के भीतर रजिस्ट्रार को देनी होती है और यह नागरिक पंजीकरण प्रणाली से होती है; मृत्यु प्रमाणपत्र संपत्ति और बीमा के काम की पूर्व-शर्त है। विदाई का रूप समुदाय के अनुसार बदलता है: हिंदू परंपरा में प्रायः दाह-संस्कार होता है और लगभग तेरह दिनों तक चलने वाला संस्कार व शोक का क्रम रहता है; मुस्लिम तथा ईसाई समुदाय दफ़नाते हैं, समय-सारणी भी अलग है। एक ही शहर के भीतर दो-तीन समानांतर व्यवस्थाएँ साथ-साथ चलती हैं। कई समुदायों में तेरहवें दिन का संस्कार शोक का औपचारिक अंत है, और उसी के बाद घर अपना द्वार फिर से खोलता है।
यह विषय क्या है?
अंतिम संस्कार की दो घड़ियाँ होती हैं: प्रशासन की और परिवार या धर्म की।
जापान में सामान्यतः दाह या दफ़न से पहले 24 घंटे की प्रतीक्षा होती है; ताइवान में मृत्यु-पंजीकरण की सीमा 30 दिन और भारत में 21 दिन है, जबकि ब्राज़ील में अंतिम दर्शन और दफ़न अक्सर 24 घंटे के भीतर होते हैं।
इंडोनेशिया के मुस्लिम समुदाय प्रायः उसी दिन या अगले दिन दफ़न करते हैं, पर बाली का ngaben महीनों या वर्षों बाद हो सकता है।
मुख्यभूमि चीन के घरेलू-पंजीकरण और दाह नियम तथा अमेरिका के राज्य-वार प्रमाणपत्र भी समय तय करते हैं।
यह पृष्ठ काग़ज़ी प्रक्रिया, समय और शोक-रीति को अलग करता है।
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स्रोत और तारीख़ें
तारीख़ें स्थानीय समय, कैलेंडर और आधिकारिक सूचनाओं पर आधारित हैं। अनुमानित या स्थानीय तारीख़ के लिए स्रोत देखें।
