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विषय: प्रस्ताव और सगाई

भारत में प्रस्ताव और सगाई कैसे मनाया जाता है?

रोज़मर्रा का विषय

भारत में सगाई प्रायः हर समुदाय के व्यक्तिगत क़ानून और रिवाज़ से होती है, और रूप बहुत भिन्न है: अँगूठियों का आदान-प्रदान, उपहारों का लेन-देन, दोनों परिवारों की औपचारिक घोषणा, और कुछ समुदायों में पहले कुंडली मिलान। सगाई स्वयं क़ानून की दृष्टि में विवाह नहीं है, पर समुदाय के स्तर पर उसे प्रायः लगभग तय बात माना जाता है, और उसे तोड़ने की सामाजिक क़ीमत क़ानूनी क़ीमत से कहीं अधिक है। दहेज क़ानूनन प्रतिबंधित है, जबकि उसे लेकर विवाद व्यवहार में बने हुए हैं। इसलिए भारत में सगाई तोड़ने का अर्थ प्रायः अदालत से नहीं, बल्कि उस बात से निपटना है जो दो परिवार और पूरा समुदाय पहले से जानता है।

यह विषय क्या है?

सगाई विवाह नहीं है। ताइवान में सगाई 17 और विवाह 18 वर्ष से है, और किसी को विवाह के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता; इंडोनेशिया में 2019 के बाद दोनों लिंगों के लिए न्यूनतम विवाह आयु 19 है, जबकि lamaran पहले परिवार की सार्वजनिक स्वीकृति बनता है। मुख्यभूमि चीन में विवाद अक्सर दहेज-जैसी bride price की वापसी पर होता है, जापान में अलग सगाई-क़ानून नहीं, भारत में व्यक्तिगत क़ानूनों का असर, ब्राज़ील में 18 पर स्वतंत्र विवाह और अमेरिका में अंगूठी के विवाद का राज्य-वार नियम है। यह पृष्ठ सामाजिक अर्थ, परिवार की बातचीत, सहमति और क़ानूनी वजन को अलग करता है।

स्रोत और तारीख़ें

तारीख़ें स्थानीय समय, कैलेंडर और आधिकारिक सूचनाओं पर आधारित हैं। अनुमानित या स्थानीय तारीख़ के लिए स्रोत देखें।