भारत में पर्यावरण दिवस कैसे मनाया जाता है?
National Pollution Prevention Day
- स्थानीय तारीख़
- 2 दिसंबर 2026
भारत का 2 दिसंबर प्रकृति नहीं, एक दुर्घटना को याद करता है। केरल के पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग का कथन सीधा है: 2 दिसंबर राष्ट्रीय प्रदूषण निवारण दिवस के रूप में मनाया जाता है — सरकारी पृष्ठ इसे National Pollution Control Day भी लिखते हैं — उन लोगों की स्मृति में जिनकी भोपाल गैस त्रासदी में मृत्यु हुई; यह घटना 2–3 दिसंबर 1984 की रात मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) के रिसाव से हुई। रसायन एवं पेट्रो-रसायन विभाग का पृष्ठ आगे की संस्थागत कड़ी दर्ज करता है: भोपाल गैस रिसाव आपदा (दावों का प्रसंस्करण) अधिनियम, 1985 दावा-पंजीकरण एवं प्रसंस्करण योजना के साथ 20.02.1985 को लागू हुआ और उसी वर्ष भोपाल गैस पीड़ितों के कल्याण आयुक्त का कार्यालय बना; उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर यूनियन कार्बाइड कॉर्पोरेशन ने फ़रवरी 1989 में 47 करोड़ अमेरिकी डॉलर मुआवज़ा जमा कराया; 31.7.2024 तक कार्यालय ने कुल 5,74,394 दावेदारों में से 5,73,959 को 1,549.33 करोड़ रुपये वितरित किए। यह दिन छुट्टी का नहीं है: कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के 3 जुलाई 2025 के कार्यालय ज्ञापन F.No.12/2/2023-JCA के आधार पर 2026 की राजपत्रित अवकाश सूचियाँ राज्यवार बनती हैं; यहाँ उद्धृत उत्तराखंड की सूची में सत्रह दिन हैं, और 2 दिसंबर उनमें नहीं है।
यह विषय क्या है?
पर्यावरण से जुड़े दिनों पर छुट्टी लगभग कहीं नहीं मिलती। इन सात देशों में अपवाद सिर्फ़ जापान है — 4 मई का मिदोरी नो हि, जो राष्ट्रीय अवकाश अधिनियम की धारा 2 में दर्ज वैधानिक अवकाश है। और उसकी जड़ पर्यावरण में नहीं है: वह दिन पहले 29 अप्रैल था, शोवा सम्राट का जन्मदिन। सिंहासन बदलने पर जन्मदिन दिसंबर चला गया और ख़ाली पड़े 29 अप्रैल को 1989 के संशोधन में "मिदोरी नो हि" नाम देकर छुट्टी बचा ली गई; 2007 में वह नाम 4 मई पर सरका दिया गया। बाक़ी छह देश अपने पर्यावरण दिवस को क़ानून, आदेश या सदन के प्रस्ताव में लिखते हैं — और उसी दस्तावेज़ में तय करते हैं कि उस दिन काम बंद नहीं होगा।
स्रोत और तारीख़ें
तारीख़ें स्थानीय समय, कैलेंडर और आधिकारिक सूचनाओं पर आधारित हैं। अनुमानित या स्थानीय तारीख़ के लिए स्रोत देखें।