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विषय: परिवार देखभाल और पीढ़ियाँ

भारत में परिवार देखभाल और पीढ़ियाँ कैसे मनाया जाता है?

रोज़मर्रा का विषय

भारत भरण-पोषण का कर्तव्य सीधे क़ानून से सौंपता है। माता-पिता व वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 संतान और निर्दिष्ट रिश्तेदारों पर बुज़ुर्गों के भरण-पोषण का क़ानूनी दायित्व डालता है, जिसमें पुत्र और पुत्री — और बहू तथा दामाद भी — समान रूप से उत्तरदायी हैं। हर उपखंड में राजस्व उपखंड अधिकारी की अध्यक्षता में अधिकरण है, जहाँ बुज़ुर्ग सीधे मासिक भत्ते के लिए आवेदन कर सकते हैं; अधिकतम सीमा दस हज़ार रुपये प्रति माह है। अपील साठ दिन के भीतर ज़िला कलेक्टर की अध्यक्षता वाले अपीलीय अधिकरण में होती है। भरण-पोषण में भोजन, वस्त्र, आवास और चिकित्सा शामिल हैं। अधिकरण के होने से भरण-पोषण घर के भीतर का नैतिक प्रश्न न रहकर ऐसा दावा बन जाता है जिस पर निर्णय हो सकता है।

यह विषय क्या है?

परिवार की देखभाल केवल साथ रहने का प्रश्न नहीं है; यह भी देखना पड़ता है कि क़ानूनी ज़िम्मेदारी किसकी है और मदद कहाँ से मिल सकती है। ताइवान में दीर्घकालिक देखभाल 1966 मूल्यांकन लाइन से शुरू होती है, जापान में 40 वर्ष से बीमा और मुख्यतः 65 वर्ष से प्रमाणित सेवा है, भारत में बुज़ुर्ग ट्रिब्यूनल से भरण-पोषण माँग सकते हैं और ब्राज़ील ने बुज़ुर्गों के अधिकार क़ानून में लिखे हैं। मुख्यभूमि चीन और इंडोनेशिया में परिवार व समुदाय की भूमिका बड़ी है, जबकि अमेरिका में Medicare, Medicaid, निजी बीमा और निजी भुगतान अलग-अलग हैं। यह पृष्ठ क़ानून और परिवार की वास्तविक क्षमता को साथ रखता है।

स्रोत और तारीख़ें

तारीख़ें स्थानीय समय, कैलेंडर और आधिकारिक सूचनाओं पर आधारित हैं। अनुमानित या स्थानीय तारीख़ के लिए स्रोत देखें।